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Tuesday, 25 July 2017
हमारी बज्म में शम्मा जलाने आ गए हैं वो...!
हमारी बज्म में शम्मा जलाने आ गए हैं वो ।
नए परवाने आ जाएँ, बुलाने आ गए हैं वो ।।
बहुत शातिर है कातिल वो निशां अपने न छोड़ेगा ।
मगर हम भी नहीं हैं, बताने आ गए हैं वो ।।
किनारे पर खड़े हो करके वो आवाज़ देते हैं ।
बड़े अंदाज़ से नैय्या डुबाने आ गए हैं वो ।।
मेरे ख्वाबों खयालों में कभी चुपके से आ कर के ।
मेरी आँखों से नींदों को चुराने आ गए हैं वो ।।
न जाने कब से था मायूस दिल का बागबां दिल मेरा ।गुलो गुलज़ार गुलशन को खिलाने आ गए हैं वो ।।
साभार http://punamsinhajgd.blogspot.com/2014/04/blog-post_17.html?m=1
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